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क्यों रखी जाती है सिर पर शिखा या चोटी? जानिए इसके धार्मिक और वैज्ञानिक कारण !

Shikha Ka Mahatva: सनातन धर्म (Sanatan Dharma) में पैदा होने से लेकर मृत्यु तक कई सारे संस्कार और मान्यताएं होती हैं. जिनका अपने अपने समय पर महत्व रहता है. जब बच्चा पैदा होता है उसके बाद उसका मुंडन संस्कार (Mundan Rites) किया जाता है. उसे द्विज कहा जाता है इसका मतलब बच्चे का दूसरा जन्म है. इसके अलावा और भी संस्कार हैं जिनमें से एक है सिर पर शिखा या चोटी रखना. वैदिक संस्कृति (Vaidik Sanskriti ) में शिखा चोटी को कहा जाता है. चोटी रखने की प्रथा ऋषि मुनि के समय से चली आ रही है. जिसका पालन हिन्दू धर्म में अभी तक किया जा रहा है. चोटी रखने को लेकर विज्ञान (Science) ने भी अपना सकारात्मक पक्ष रखा है. आइए जानते हैं कि क्यों हिंदू धर्म में चोटी रखना अनिवार्य बताया गया है. क्या कारण है चोटी रखने का ! बच्चे का जब भी मुंडन किया जाता है या फिर किसी के घर में बुजुर्ग का निधन हो जाता है तो जो व्यक्ति अपना सिर मुंडवाता है, उस समय सिर पर थोड़े से बाल छोड़ दिए जाते हैं. जिसे चोटी या शिखा कहा जाता है. यह संस्कार यज्ञोपवित या जनेऊ के समय भी किया जाता है. सिर में जहां पर चोटी रखी जाती है वो जगह सहस्त्रा...

आखिर क्यों प्रभु श्रीकृष्ण को "56" भोग लगाया जाता है?

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि प्रभु श्रीकृष्ण ( Krishna ) को "56" भोग का भोग लगाया जाता है परन्तु ऐसा होने के पीछे क्या कारण है? आखिर "56" भोग की इस परंपरा की शुरुआत कहाँ से हुई ? त्रेतायुग के समय की बात है। स्वर्ग के अधिपति राजा इंद्र जो कि सभी देवताओं के राजा भी माने जाते हैं। मनुष्य तथा देवताओं के पुजनीय है। सभी के द्वारा इंद्र की पूजा बड़े धूमधाम से की जाती थी। क्योंकि लोगों का मानना था कि इंद्र ही सबसे बड़े देवता हैं और यदि इंद्र क्रोधित हुए तो धरती पर अल्पवृष्टि या अतिवृष्टि हो जायेगी। इसी डर के कारण सभी मनुष्य इंद्र से बहुत डरते थे और उन्हें प्रसन्न रखने के लिए उनकी पूजा बड़े धूमधाम से की जाती थी। मनुष्यों के डर को इंद्र अपना सम्मान समझता था। एक बार दीपावली के अगले दिन सभी वृन्दावनवासी इंद्र की पूजा की तैयारियों में व्यस्त थे। प्रभु श्रीकृष्ण ( krishna ) अपनी गैयाओं के साथ जंगल की और प्रस्थान कर रहे थे कि तभी यशोदा मैयां ने उन्हें कहा लाला पहले इंद्र की पूजा कर लो उसके बाद गइया चराने जाना प्रभु श्रीकृष्ण ने अपनी मैयां से पूछा कि मैयां हम इंद्र की पूजा क्यों करते ह...

सुरमे का रहस्य क्या है ?

आज भी कई महिलाएं आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए सुरमा लगाती हैं। यह बिल्कुल काजल की तरह ही होता है, लेकिन इससे आंखों की एक अलग ही खूबसूरती देखने को मिलती है। हालांकि, ऐसा कहा जाता है कि मुस्लिम महिलाएं इसका उपयोग ज्यादा करती हैं। यही नहीं शादी-ब्याह जैसे फंक्शन में इसका उपयोग पुरुष भी करते हैं।   By:-culturalboys.

हम देवी देवताओ की पूजा करते ही क्यों हैं ?

पूजा  का प्रारंभ किसी खास देवी या देवता को खुश करने के लिए हुआ था। ताकी देवी-देवता की  पूजा  करके उनको खुश किया जा सके और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके। मनुष्यों की मनोकामनाओं की पूर्ति, परेशानियों से निजात, शादी, मान-सम्मान में बढ़ोतरी, धन-संपत्ति तथा अन्य कामनाओं की पूर्ति हेतु देवी-देवताओं की  पूजा  की जाती है।   By:-culturalboys.

पूजा घर में कौन सा कलर करवाना चाहिए?

  इसी सकारात्मकता को बनाये रखने के लिए  पूजा घर  में उचित रंग का होना बहुत जरूरी है। वास्तु के अनुसार  पूजा घर  की दिवारों पर हल्के पीले रंग को सबसे शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप लाल, गेरुआ या केसरिया रंग भी करवा सकते हैं। और फर्श के लिए सफेद रंग के पत्थर का चुनाव करना बेहतर होता है । By:-culturalboys.

इन तीन कारणों से मंदिर में बजाते हैं घंटी, जानें इसका वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व !

माना जाता है कि पूजा करने वक्त घंटी जरूर बजानी चाहिए। इतना ही नहीं जब किसी मंदिर में देवी/देवता के दर्शन करने जाते हैं तो वहां मंदिर की घंटी जरूरी बचानी चाहिए। लेकिन क्या हम जानते हैं कि घंटी क्यों बजानी चाहिए? इसके पीछे क्या कारण हैं और इसका क्या महत्व है? आज हम आपको इसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं। आप किसी भी मंदिर पर जाएंगे तो पाएंगे कि वहां मंदिर के प्रवेश द्वार या प्रमुख प्रवेश द्वार पर घंटी टंगी होती है। यहां आने वाले पहले घंटी बजाते हैं इसके बाद आगे बढ़ते हैं। इसी प्रकार घर या मंदिर में पूजा करते वक्त लोग घंटी बजाते हैं। घंटी बजाने के पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों कारण हैं। घंटी बजाने के वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व - वैज्ञानिक कारण - घंटी जब बजाई जाती है तो हमारे जीवन पर उसका साइंटिफिक प्रभाव भी पड़ता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब घंटी बजाई जाती है उससे आवाज के साथ तेज कंपन्न पैदा होता है। यह कंपन्न हमारे आसपास काफी दूर तक जाते हैं, जिसका फायदा यह होता है कि कई प्रकार के हानिकारक जीवणु नष्ट हो जाते हैं और हमारे आसपास वातावरण पवित्र हो जाता है। यही वजह है कि मंदिर व उसके आसपा...

मुस्लिम टोपी क्यों पहनते हैं !

टोपी पहनना हमारे लिए जरूरी नहीं है ओर ना ही कुरान में इसका जिक्र है। लेकिन मुसलमानों कि संस्कृति ओर पहचान है। बिना टोपी पहने भी एक इंसान अच्छा मुसलमान बन सकता है। एक वजह ये भी है कि मस्जिद या दरगाह में अदब के साथ दाखिल होने में सर ढका हुआ होना उस जगह का आदर माना जाता है।   By:-cuturalboys.